बोलने की आदत नहीं करके काबिलियत का सबूत दूँगा। ख़िलाफ़ बोलते हैं जो आज मेरे कल मैं उनकी कह के लूँगा।
ताकत अपने लफ्जों में डालो आवाज में नही,
तेरी इस बदमाशी की खाज को जड़ से मेट दूँगा
अभी वाकिफ़ ही कहाँ है लोग हमारे उड़ान से वो और थे जो बह गए तूफ़ान में
यह शायरी उन लोगों के लिए है जो अपनी शर्तों पर जीते हैं। हर पंक्ति में बेखौफ अंदाज झलकता है, जो समाज के दबाव के आगे झुकने से इंकार करता है।
हम वो इंसान हैं जिन्हें किसी की परवाह नहीं, क्योंकि हम खुद अपनी परवाह करते हैं…!
वो हमारी हैसियत पूछते है, उनकी शख्सियत बिक जाए इतनी हैसियत है हमारी
कुछ लोग हमारे बारे में क्या सोचते हैं ये हमें नहीं पता, और ना ही जानने की कोशिश करते हैं…!
बड़ा फर्क है तुम्हारी और हमारी तालीम में
जितना तुम मुझे समझते हो, उससे कहीं ज्यादा मैं खुद को जानता हूँ…!
ज़िन्दगी जीनी है तो अपने नियम खुद बनाओ, दूसरों के नियम पर चलोगे तो हमेशा पीछे रह जाओगे…!
मेरी पहचान मेरा व्यक्तित्व है, जिसे सिर्फ समझदार लोग ही समझ सकते हैं…!
आसमान की बुलंदियों से बातें करता है हौसला,
हम बिछड़ गए तो रोओगे, क्योंकि हमारी लौट के आने की आदत Attitude Shayari नहीं।”